लखनऊ, दिसम्बर 2 -- प्रदेश में उद्योग लगाने वालों, टाउनशिप तैयार करने वालों और शहरी निकायों द्वारा चलाए जा रहे सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों (एसटीपी) के लिए जल व वायु प्रदूषण का अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) लेना और उनका नवीनीकरण करवाना महंगा होगा। मंगलवार को योगी कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश जल (मल और व्यावसायिक बहिस्राव निस्तारण के लिए सहमति) (तृतीय संशोधन) नियमावली, 2025 और उत्तर प्रदेश वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) (चतुर्थ संशोधन) नियमावली, 2025 को मंजूरी दे दी। वर्ष 2008 के बाद अब दरों में इजाफा किया जा रहा है। प्रदूषण के स्तर, उद्योगों में पूंजी निवेश की रकम और आदि के मुताबिक दरों को कई श्रेणियों में बांटा गया है। वन एवं पर्यावरण विभाग के मुताबिक केंद्र सरकार ने इस साल जनवरी में शुल्कों के दरें फिर से तय करने के निर्देश दिए थे। शुल्क की सात...
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