गया, जनवरी 6 -- छोटी-बड़ी निदियों में जल का संकट गहराने से पर्यारण पर गहरा असर पड़ा है। गर्मी के दिनों में तापमान 45 तक पहुंचना और ठंड में इसके चार डिग्री तक आ जाने से लोग सकते में हैं। जलीय जंतुओं पर तो इसका सीधा असर पड़ा है। कई तरह की मछलियों की प्रजाति का नाम सुनने को भी नहीं मिलता। चलभा, पोठिया, नेकुआ, गरई, केकड़ा मछलियां अब आसानी से नहीं दिखते। नदी के पानी में रहने वाले कीड़े मकौड़ों को खाकर जीवित रहने वाले चील, बगुला, काड़हार पक्षी पलायन कर गए हैं। वर्षों तक पेड़ का पोषण मिलता था। लेकिन अब इसकी गुजाइंश कम बची है। कम वर्षों में ही हरे भरे पेड़ सूखने लग रहे। कई बार पानी की तलाश में जानवार शहर की तरफ भागते हैं। इस कारण ग्रामीणों को बड़ी समस्या होती है। नदियों के सूखने से पानी की गुणवत्ता कमजोर हुई जो कई प्रकार की बीमारियों को बुलावा है...
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