भागलपुर, अक्टूबर 22 -- शुरूआती चुनावों में प्रत्याशियों के नाम की बजाय पार्टियों की पहचान को अलग-अलग रंग की होती थीं मतपेटियां फोटो- : वयोवृद्ध शिवदत्त विश्वकर्मा, 90 वर्ष झाझा, निज संवाददाता 1952 से ही शुरू हुए झाझा विधान सभा के चुनावी राजनीति के सफर के शुरूआती चुनावों में मतपेटियों पर उम्मीदवारों के नाम नहीं हुआ करते थे। प्रत्याशियों के नाम की बजाय अलग-अलग रंग की मतपेटियों के जरिए उनकी पार्टियों की पहचान स्पष्ट की जाती थी। निर्दलीय के मामले में भी बैलट बॉक्स का रंग ही उनकी पहचान हुआ करता था। और....वोटर भी अपनी पसंद की पार्टी या नेता को वोट उस रंग की पेटी में डालकर किया करते थे। '70 के दशक के पूर्व तक बूथ लूट जैसे वाकये कल्पना तक से कोसों दूर होते थे। कोई अप्रिय या हिंसक वारदात जैसी बातें भी शायद ही कभी होती थीं। इसलिए सुरक्षा के भी कोई ...