नई दिल्ली, जनवरी 12 -- लगभग 1 किलोमीटर की ऊंचाई से गिरने वाला इसका पानी अक्सर जमीन तक पहुंच ही नहीं पाता और बीच हवा में ही गायब हो जाता है। वैज्ञानिकों के अनुसार, यह कोई जादू नहीं बल्कि भौतिकी का कमाल है। जब पानी इतनी ऊंचाई से गिरता है, तो हवा का दबाव उसे छोटी-छोटी बूंदों में तोड़ देता है। तेज हवाएं पानी की इन नन्हीं बूंदों को बिखेर देती हैं, जिससे वे एक घनी धुंध या कोहरे का रूप ले लेती हैं। सूरज की गर्मी और खुली हवा के संपर्क में आने से यह धुंध भाप बनकर उड़ने लगती है। इस कारण ऐसा लगता है कि झरना हवा में गायब हो गया है।

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