मुंगेर, जून 14 -- जमालपुर, निज प्रतिनिधि। लौहनगरी के नाम से प्रसिद्ध जमालपुर सिर्फ एशिया के प्रथम रेल इंजन कारखाना के लिए ही नहीं जाना जाता है, बल्कि बाबा जमाल शाह की दरगाह के नाम से भी प्रसिद्ध है। कहते हैं पत्थर और लौह की इस नगरी का नाम जमालपुर बाबा जमालशाह के नाम पर पड़ा है। हर साल की तरह इसबार भी बकरीद के 22वें रोज यानि 22 जून (रविवार) को ईस्ट कॉलोनी क्षेत्र स्थित बाबा का दरगाह पर 378वां सालाना उर्स का आयोजन पूरी भव्यता के साथ होगा। सालाना उर्स मनाने का इस्लामिक रीति-रिवाज के अनुसार तीन दिनों पूर्व से ही शुरू हो जाती है। इस सालाना उर्स में देश के कोने-कोने से हर धर्म के श्रद्धालु जुटते हैं। ऐसी मान्यता है कि बाबा जमालशाह की जमाल (सौंदर्य) से न सिर्फ जमालपुर रौशन हो रहा है, बल्कि जो हाथ मनोकामनाओं की उठे, सबकी मुरादें भी पूरी करते चले आ...
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