भागलपुर, नवम्बर 14 -- भागलपुर, वरीय संवाददाता/ गौतम वेदपाणि कभी बिहार में विधानसभा चुनाव के बाद मतगणना यानी वोटों की गिनती का दौर बेहद लंबा और रोमांचक हुआ करता था। दो-दो दिन तक मतगणना चलती रहती थी, परिणाम आने में देरी होती थी। पूरे निर्वाचन क्षेत्र में तनाव और उत्सुकता बनी रहती थी। आज से दो-तीन दशक पहले, जब चुनावों में मतपेटियों या बैलेट बॉक्स का उपयोग होता था। मतदाता पर्ची पर अंकित प्रत्याशियों के नाम व चुनाव चिह्न के सामने मोहर लगाते थे। मतपत्र को अच्छी तरीके से मोड़कर इसे मतपेटी में डालते थे। पहले संसाधन सीमित थे, तकनीक का अभाव था और मतों की गिनती पूरी तरह मानवीय मेहनत या मैनुअल तरीके पर निर्भर रहती थी। समय के साथ मतगणना का तरीका पूरी तरह बदल गया है। दूसरी बार विधानसभा चुनाव लड़ने वाले सेल्स टैक्स के पूर्व अधिकारी सुबोध मंडल ने बताया क...
Click here to read full article from source
To read the full article or to get the complete feed from this publication, please
Contact Us.