बांदा, नवम्बर 18 -- बांदा। भले ही सूबे के स्वास्थ्य मंत्री व डिप्टी सीएम बृजेश पाठक सरकारी अस्पतालों में मरीजों को बाहर की दवाएं न लिखने की चेतावनी देते हैं, लेकिन इसका असर जिले में दिखाई नहीं पड़ता है। जनऔषधि केंद्र संचालकों का दावा है कि उनके पास सभी प्रकार की दवाएं उपलब्ध हैं, फिर भी कमीशन के खेल के चलते डाक्टर मेडिकल स्टोर के पर्चे पर ही बाहर की महंगी दवाइयां लिख रहे हैं। जिले में जिला अस्पताल व सीएचसी समेत 11 सरकारी और 6 निजी केंद्र संचालित हैं। इसको लेकर हिन्दुस्तान अखबार के संवाददाता ने पड़ताल की तो हकीकत सामने आ गई। सोमवार को जिला अस्पताल में सुबह 11 बजे ओपीडी में मरीजों को चिकित्सक देखते मिले। इस दौरान डाक्टर ने मेडिकल स्टोर से जुड़े युवक डॉक्टरों के पास पहले से मौजूद थे। जानकारी मिलते ही वह वहां से बचकर निकल गए। डॉक्टर ने मेडिकल...