धनबाद, नवम्बर 26 -- धनबाद, मुख्य संवाददाता। आईआईटी आईएसएम में मंगलवार को सौ वर्षीय व्याख्यान शृंखला के तहत भू-वैज्ञानिक डॉ ओपी पांडेय ने भारतीय शील्ड की जटिल संरचना के बारे में नए वैज्ञानिक निष्कर्ष साझा किए। उन्होंने हालिया भू-भौतिकीय अध्ययन और गहरे वैज्ञानिक ड्रिलिंग-खासकर 617 मीटर गहरे केएलआर-वन बोरहोल (किलारी भूकंप क्षेत्र) के डाटा के आधार पर बताया कि 2.57 अरब वर्ष पुराना क्रिस्टलीय आधार चट्टानों से बना है, जिनपर तीव्र तापमान, दबाव और भू-रसायनिक बदलाव का असर पड़ा है। आईआईटी के पूर्ववर्ती छात्र रहे प्रो पांडेय ने भारत के असामान्य रूप से गरम और भू-गतिकीय रूप से अस्थिर भूमंडलीय संरचना (लिथोस्फीयर) पर व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि मेंटल से आए हाइड्रोथर्मल द्रवों से हुई मेटासोमैटिज्म प्रक्रिया के कारण इन चट्टानों की भूकंपीय गति लगभग 15 फ...