नई दिल्ली, दिसम्बर 10 -- सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि अवमानना की शक्ति का प्रयोग करते समय अदालतों को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि यह न तो न्यायाधीशों के लिए व्यक्तिगत सुरक्षा कवच है और न ही आलोचना को दबाने की तलवार है। यह टिप्पणी न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने की। पीठ ने बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा आपराधिक अवमानना के मामले में एक महिला को दी गई एक सप्ताह की सजा को पीठ ने माफ कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दया न्यायिक विवेक का अभिन्न अंग बनी रहनी चाहिए, और अवमानना करने वाले व्यक्ति द्वारा अपनी गलती को ईमानदारी से स्वीकार करने और उसके लिए प्रायश्चित करने की इच्छा व्यक्त करने पर दया दिखाई जानी चाहिए। अदालत ने कहा कि दंड देने की शक्ति में क्षमा करने की शक्ति भी निहित है, बशर्ते अदालत के समक्ष उपस्थित व्यक्ति अप...