सिमडेगा, मई 7 -- सिमडेगा। जिले में आदिवासी परिवारों के लिए जंगल आज भी उनकी जीविका का साधन बना हुआ है। जिले के सभी प्रखंड के आदिवासी जीविकोपार्जन के लिए जंगल पर ही आश्रित हैं। यहां के ग्रामीण इन दिनों चार बीज चुनने में व्यस्त हैं। चार का बीज (चिरौंजी) काफी महंगा एवं नकदी वनोपज है। जो गरीब मूलवासियों के लिए अर्थ व्यवस्था का एक सशक्त माध्यम है। इसकी बिक्री कर ग्रामीण अपने अनेक कार्य सुलभता से निपटाते हैं। हालांकि पहले के वर्षों में ग्रामीण चार के पकने के बाद तोड़कर लाते थे एवं अपने घरों में चार से बीज निकालते थे। पर कुछ वर्षों से गुठली सहित साबुत चिरौंजी की खरीदी होने से लोग कच्चे चार को तोड़कर ले आते हैं। जबकि पके चार से दोहरा लाभ मिलता है। पके चार के ऊपरी हिस्से जो काफी मीठा होता है, ग्रामीण बड़े चाव से खाते हैं। उसके बाद गुठली से चिरौंजी निक...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.