नई दिल्ली, मार्च 7 -- आपके सामने कोई पेड़ काटे तो आप क्या करेंगी? हममें से कई लोगों के लिए यह आम बात हो सकती है और शायद हम इस पर खास ध्यान भी न दें। खास तो तब हो जाता है, जब कोई आवाज उठाने की हिम्मत दिखाए और यही एक अंतर किसी भी व्यक्ति को आम से खास बनाता है। एक आम महिला और पूर्णिमा देवी बर्मन में यही तो अंतर है। उन्हें अहसास है कि पेड़ कटने पर किसका सबसे बड़ा नुकसान हो सकता हैऔर प्रकृति पर सिर्फ मनुष्य का ही अधिकार नहीं है। तभी तो पक्षियों की एक खास प्रजाति को बचाना ही पूर्णिमा ने जीवन का उद्देश्य बना लिया। अपने अभियान को पूर्णिमा आगे बढ़ाती गई और कारवां बनता गया।कौन हैं पूर्णिमा? पूर्णिमा देवी बर्मन का जन्म असम के कामरूप इलाके में हुआ था और उनकी पढ़ाई गुवाहाटी यूनिवर्सिटी से हुई। वहां से उन्होंने ईकोलॉजी और वाइल्ड लाइफ बायोलॉजी में विशेषज्ञता...
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