लखनऊ, दिसम्बर 5 -- लखनऊ, संवाददाता। गोमती नगर के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित दिव्य कला प्रदर्शनी व सांस्कृतिक कार्यक्रम में दृष्टि दिव्यांग अरविंद सैनी ने प्रतिष्ठान की दोपहर गुलाबी बना दी। कहते हैं हौसला और प्रतिभा हो तो कमियां उड़ान नहीं रोक सकतीं, दृष्टिबाधित अरविंद ने जैसे ही पंकज उदास की गजल गाना शुरू की, सभी श्रोता एक साथ गुनगुनाते और झूमते नजर आए। अरविंद ने तू मेरी ही किताब हो जाए, हंसता चेहरा गुलाब हो जाए.., सुनाया तो लोगों को इंडियन आइडल फेम दिवाकर की याद दिला गई। अरविंद की अगली पंक्ति छू के तेरे हसीन होंठों को, सादा पानी शराब हो जाए..ने श्रोताओं के दिलों को छू लिया। इसके अलावा कई दिव्यांगों ने रंगारंग प्रस्तुतियां दी। यहां कई राज्यों के दिव्यांगों ने तमाम घरेलू, डेकोरेटिव, खाद्य, कपड़ों आदि उत्पादों की प्रदर्शनी लगाई। पुन...
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