रांची, फरवरी 23 -- रांची, संवाददाता। रिम्स के गलियारों में उस दिन सन्नाटा भी भावुक था। एक पिता अपने 6 साल के मासूम बेटे को हमेशा के लिए विदा कर रहा था। लेकिन उसी पल उसने ऐसा निर्णय लिया, जिसने अंधेरे में डूबी दो जिंदगियों को उजाला दे दिया। ब्रेन ट्यूमर से जूझ रहे कांके के होचर निवासी सुजीत मुंडा के बेटे का रिम्स के न्यूरोसर्जरी विभाग में इलाज चल रहा था। चिकित्सकों की तमाम कोशिशों के बावजूद मासूम को बचाया नहीं जा सका और परिवार पर दु:ख का पहाड़ टूट पड़ा। छलकते आंसुओं के बीच पिता ने कहा उनका बेटा अब इस दुनिया में नहीं है। वह इस खूबसूरत दुनिया में जीना और उसे देखना चाहता था। लेकिन उसकी आंखों से कोई और दुनिया देख सके तो यही उसकी सच्ची विदाई होगी। इस पर रिम्स आई बैंक की टीम ने तत्परता दिखाते हुए तीन घंटे के भीतर प्रक्रिया पूरी की और परिवार की स...