भागलपुर, जनवरी 28 -- भागलपुर, वरीय संवाददाता छह साल का मयंक। अपने पिता की अंगुली पकड़ता है। पूछता है, अब मैं आपके साथ रहूंगा। घर जाऊंगा। स्कूल में पढ़ूंगा। उदास चेहरे के साथ उसका सवाल यह भी होता है कि मां हमारे साथ घर नहीं जाएगी? मां से बिछड़ने का गम और जेल की चहारदीवारी से निकलने की खुशी लिए मयंक सोमवार को अपने पिता संग घर चला गया। वह अपनी मां के साथ शहीद जुब्बा सहनी केंद्रीय कारा परिसर में स्थित महिला मंडल कारा में रह रहा था। छह साल का होने पर उसे पिता के साथ घर जाने दिया गया। उसकी मां आजीवन कारावास की सजा काट रही है। सक्षम पदाधिकारी द्वारा बच्चे की उम्र का सत्यापन किए जाने और डीएम की अनुमति मिलने के बाद बच्चे को पिता के साथ जाने दिया गया। सास और ननद को केरोसिन डालकर जला डाला था जिस बच्चे को सोमवार को जेल की चहारदीवारी से आजादी मिली उसक...
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