नई दिल्ली, नवम्बर 27 -- घर में चौका-चूल्हा करने वाली महिलाएं अब ठान लें तो क्या नहीं कर सकती। खेती-किसानी में जनपद की महिलाएं किसी से कम नहीं है। इसका जीवंत उदाहरण किसान मेले में देखने को मिला। घर के काम के साथ खेती में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली प्रगतिशील महिला किसानों ने अपने-अपने अनुभव साझा किए। महिलाओं ने बहुत छोटे स्तर से खेती की शुरुआत की। इसके बाद अन्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से जोड़ा। वर्तमान में महिला किसान खुद का किसान उत्पादक संगठन संचालित कर रही है। साथ ही खुद की उगाई हुई फसल से उत्पाद भी तैयार कर रही हैं। ग्रामीण आंचल में रहने के बाद भी महिलाओं ने अपने हुनर को दबने नहीं दिया। अपने किसान पति के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम किया। आज वह हर काम में पति का हाथ बंटा रही हैं साथ ही आर्थिक स्तर पर भी बराबरी की कगार ...
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