पूर्णिया, अगस्त 4 -- जलालगढ़, एक संवाददाता। महर्षि मेंही वेदांत आश्रम किला के समीप आयोजित सत्संग कार्यक्रम में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। सत्संग की महिमा पर प्रकाश डालते हुए संत गणेशानंद बाबा ने अपने प्रवचन में कहा कि जीवन की सभी परेशानियों और दुखों का मूल कारण हमारी चाहतें हैं। उन्होंने कबीर साहब का दोहा उद्धृत करते हुए कहा कि 'चाह गई, चीता मिटी, मानवा बे प्रभाव; जो कछु ना चाहिए, सोई शहंशाह। बाबा ने कहा कि छोटे से बड़े तक सभी के मन में कोई न कोई चाहना होती है, केवल संत ही ऐसे होते हैं जिनके पास कोई चाह नहीं होती। कबीर साहब ने कहा कि 'क्या मांगू कछु थिर न रहाई, देखते नयन चलो जग जाति। यह बताता है कि सांसारिक वस्तुएं यहीं रह जाती हैं, हमारे साथ कुछ भी नहीं जाता। बाबा ने प्रवचन में आगे कहा कि अगर कोई संतान की इच्छा करता है तो सवाल उठता ...
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