नवादा, फरवरी 22 -- नवादा/कौआकोल, हिसं/एसं। ज्येष्ठ की तपिश और लू के थपेड़ों वाली गर्मी आने में अभी वक्त है, लेकिन कुदरत के बदलते मिजाज ने फागुन के अंत में ही अपनी तल्खी दिखानी शुरू कर दी है। कौआकोल जैसे दुर्गम और पथरीले पहाड़ी क्षेत्रों में भूमिगत जलस्तर ने अभी से गोता लगाना शुरू कर दिया है, जिसके परिणामस्वरूप एक बार फिर मानवीय संवेदनाओं और बेजुबान मवेशियों के अस्तित्व का संकट गहरा गया है। चिलचिलाती धूप और सूखते जलस्रोतों के बीच, कौआकोल प्रखंड के सैकड़ों पशुपालक अपने आशियाने को छोड़कर मजबूरी के सफर पर निकल पड़े हैं। कौआकोल प्रखंड में पानी की विकराल समस्या और चारे की अनुपलब्धता ने पशुपालकों के सामने दो ही रास्ते छोड़े हैं, या तो अपने मवेशियों को दम तोड़ते देखें या फिर सैकड़ों मील दूर अनजान रास्तों पर निकल जाएं। अधिकांश पशुपालकों ने अपने पशुधन को ...