नई दिल्ली।, जनवरी 15 -- ईरान के विभिन्न शहरों में आर्थिक तंगी और राजनीतिक असंतोष के कारण भड़की विरोध प्रदर्शन की आग ने भारत की भी चिंता बढ़ा दी है। भारत के लिए मुख्य चिंता यह नहीं है कि ईरान का वर्तमान नेतृत्व इस संकट से उबर पाएगा या नहीं, बल्कि चिंता इस बात की है कि यदि ईरान कमजोर होता है या वहां सत्ता का पतन होता है तो भारत के पहले से ही जटिल रणनीतिक वातावरण पर इसका क्या असर पड़ेगा। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत के लिए ईरान के साथ संबंध कभी वैचारिक नहीं रहे, बल्कि भूगोल, पहुंच और क्षेत्रीय संतुलन पर आधारित रहे हैं। भारत के लिए ईरान का सबसे बड़ा महत्व उसकी भौगोलिक स्थिति है। पाकिस्तान द्वारा अफगानिस्तान और मध्य एशिया के लिए जमीनी रास्ता रोकने के कारण, ईरान ही भारत के लिए एकमात्र 'वेस्टर्न कॉरिडोर' रहा है। भारत ने भारी निवेश...