नई दिल्ली, फरवरी 18 -- आचार्य चाणक्य ने अपनी नीति शास्त्र में जीवन की सच्चाई को बहुत ही कठोर लेकिन स्पष्ट शब्दों में कहा है। एक प्रसिद्ध श्लोक में वे बताते हैं -मूर्खशिष्योपदेशेन दुष्टास्त्रीभरणेन च।दु:खिते सम्प्रयोगेण पण्डितोऽप्यवसीदति।। अर्थात - मूर्ख शिष्य को उपदेश देने से, दुष्ट स्त्री का भरण-पोषण करने से और दुखी व्यक्ति के साथ लगातार रहने से विद्वान व्यक्ति भी दुखी हो जाता है और अवसाद में चला जाता है। चाणक्य के अनुसार ये तीन प्रकार के लोग या स्थितियां ऐसी हैं, जो सबसे बुद्धिमान व्यक्ति को भी जीवनभर परेशान रखती हैं और सुख की प्राप्ति नहीं होने देती हैं। आइए विस्तार से समझते हैं।मूर्ख शिष्य को उपदेश देने की गलती चाणक्य कहते हैं कि अगर कोई व्यक्ति मूर्ख शिष्य को बार-बार उपदेश देता है, समझाता है और सही-गलत का ज्ञान देने की कोशिश करता है,...
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