नई दिल्ली, फरवरी 24 -- चाणक्य नीति में आचार्य चाणक्य ने जीवन के व्यावहारिक नियम बहुत स्पष्ट और कठोर शब्दों में बताए हैं। एक प्रसिद्ध श्लोक में वे कहते हैं:नखीनां च नदीनां च शृंगीणां शस्त्रपाणिनाम्।विश्वासो नैव कर्तव्यो स्त्रीषु राजकुलेषु च ।। अर्थात् - नख वाले (जानवर), नदी, सींग वाले (जानवर), शस्त्र धारण करने वाले, स्त्रियों और राजकुल (राजपरिवार) के लोगों पर कभी भी पूर्ण विश्वास नहीं करना चाहिए। यह श्लोक हमें सावधान करता है कि कुछ लोग या स्थितियां स्वभाव से ही अप्रत्याशित और खतरनाक हो सकती हैं। आइए विस्तार से समझते हैं कि चाणक्य जी ने इन तीन मुख्य श्रेणियों में किस तरह के लोगों से दूरी बनाए रखने की सलाह दी है।1. नखी और शृंगी (नख वाले और सींग वाले जीव) चाणक्य जी का पहला संकेत जंगली या खतरनाक जीवों की ओर है। नख वाले (शेर, बाघ, चीता) और सींग...