मुजफ्फरपुर, फरवरी 9 -- मुजफ्फरपुर। चाय और लस्सी जब अपनी माटी के कुल्हड़ में हो तो इसकी सोंधी महक आत्मा को तृप्त कर देती है। कुछ दुकानों पर लोग कुल्हड़ों में ही चाय या लस्सी पीने जाते हैं। ये कुल्हड़ इन दुकानों की खास पहचान होती है। ये मिट्टी के कुल्हड़ व गिलास चाय एवं लस्सी का स्वाद ही नहीं बढ़ाते, बल्कि पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिए भी अनुकूल हैं। बावजूद इन्हें अपेक्षित सरकारी प्रोत्साहन नहीं मिल सका है। पताही जगरनाथ में कुंभकारों के लगभग दस परिवार कुल्हड़ बनाने के पुश्तैनी पेशे से जुड़े हैं। इनका कहना है कि सरकारी विभागों में कुल्हड़ की खरीद अनिवार्य हो, समय-समय पर प्रशिक्षण, सरकारी योजनाओं का लाभ और सस्ता ऋण मिले तो न केवल बड़ी संख्या में लोग इस पेशे से जुड़ेंगे, बल्कि कुल्हड़ से जिले को नई पहचान मिलेगी। जिले के कुंभकार पहले हस्तचालित च...