गाजीपुर, दिसम्बर 2 -- देवकली, हिन्दुस्तान संवाद। 51वें मानस सम्मेलन के दूसरे दिन आचार्य चन्द्रेश महाराज ने प्रवचन देते हुए कहा कि एक मां जहां 3-4 बच्चों का पालन-पोषण कर लेती है। वहीं कई बार वही बच्चे अपनी मां की सेवा नहीं कर पाते। दुनिया में निर्धन धनवान से डरता है, दुर्बल बलवान से, लेकिन पूरी दुनिया चरित्रवान व्यक्ति से भयभीत रहती है, क्योंकि ऊंचा चरित्र व्यक्ति को सर्वत्र पूज्य बनाता है। उन्होंने कहा कि जिसे दुनिया छोड़ देती है, प्रभु उसे अपना लेते हैं। सती और सेवरी के प्रसंगों का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि धैर्य, सेवा और भक्ति का फल हमेशा मिलता है। भगवान शिव विवाह प्रसंग का वर्णन करते हुए कहा कि सती शरीर त्यागने के बाद भी चाहती थीं कि भगवान शिव ही उन्हें पति रूप में प्राप्त हों, इसलिए उन्होंने कठोर तपस्या की। शिव समाधि में लीन थ...