गिरिडीह, जुलाई 14 -- कलकल निनाद करती दक्षिणवाहिनी इरगा नदी के तट पर हरी भरी वादियों से अच्छादित सुरम्य तीर्थस्थल झारखंड धाम कई पौराणिक और दंत कथाओं को अपने अंदर सहेजे हुए है। कहा जाता है कि झारखंडधाम का अतीत रामायण और महाभारत काल से जुड़ा हुआ है। जमुआ प्रखंड के सरहद पर अवस्थित इस पर्यटन स्थल को इरगा नदी धनवार प्रखंड से अलग करती है। ईरगा नदी धनवार प्रखंड में पड़ती है। झारखंड धाम हीरोडीह थाना क्षेत्र में अवस्थित है, लेकिन जमुआ और परसन थाना क्षेत्र के बॉर्डर को छूता है। इसलिए झारखंड धाम में तीनों थाना की चौकसी रहती है। यही कारण है कि यह जगह दिन और रात में भी सुरक्षित हैं लोग यहां रात में भी शादी विवाह के मौसम अथवा पूर्णिमा या अन्य त्योहारों पर आते रहते हैं। 400 साल पूर्व यहां आम लोगों द्वारा पूजा शुरू की गई। पुराने लोग बतलाते हैं झारखंडी नाम...
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