सुपौल, नवम्बर 22 -- करजाईन बाजार, एक संवाददाता ग्रामीण इलाकों के लोगों को रोजगार दिलाने को लेकर साल 1992 में राघोपुर प्रखंड क्षेत्र की बौराहा पंचायत में खादी ग्राम उद्योग के तहत चरखा केंद्र की स्थापना की गई थी। इसको लेकर स्थानीय ग्रामीणों के बीच जबरदस्त उत्साह दिखा था। सैकड़ों ग्रामीणों ने इस कार्य को सीखने को लेकर अपनी दिलचस्पी जाहिर की थी। केंद्र में ट्रेनरों के द्वारा सूत काटने, बुनने और करघा चलाने के गुर सिखाए जाते थे। वहीं प्रशिक्षण के बाद पुरुषों के साथ-साथ सैकड़ों महिलाओं ने भी इस कार्य के जरिए खुद को आत्मनिर्भर बनाया। लेकिन, महज नौ साल बाद विभागीय उदासीनता के कारण चरखा केंद्र पर ताला लटक गया। तकरीबन 33 साल बीत जाने के बावजूद अब भी सैकड़ों ग्रामीण चरखा केंद्र खुलने के सपने संजोए हुए हैं। स्थानीय निवासी सतेन्द्र साह, भविलाल मुखिया, ...
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