लखनऊ, फरवरी 7 -- समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने घूसखोर पंडत फिल्म का नाम लिए बिना कहा है कि इसका शीर्षक केवल आपत्तिजनक नहीं, बेहद अपमानजनक भी है। उस फिल्म का नाम लिखने से भाजपा का उस समाज का तिरस्कार करने का उद्देश्य और भी अधिक पूरा होगा। इसका नाम बदलकर भी रिलीज नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा है कि जब निर्माताओं को आर्थिक हानि होगी, तभी ऐसी फिल्में बनना बंद होंगी। अखिलेश ने शनिवार को एक बयान में कहा है कि ये 'रचनात्मक स्वतंत्रता' या 'क्रिएटिव लिबर्टी' के हनन की बात नहीं है, ये 'रचनात्मक समझ' या कहिए 'क्रिएटिव प्रुडेंस' की बात है कि पूर्वाग्रह से ग्रसित जो फिल्म किस एक पक्ष की भावनाओं को, एक सोची-समझी साजिश के तहत आहत करे वो मनोरंजन कैसे हो सकती है। अगर उद्देश्य मनोरंजन नहीं है तो किसी एक समाज को बदनाम करने के एजेंडे के...