मधुबनी, सितम्बर 6 -- बाबूबरही,निज संवाददाता। कमला, बलान, सोनी सहित अन्य नदियों और नहरों के आसपास घटते जल क्षेत्र का सीधा असर दुर्लभ जल पक्षियों पर पड़ रहा है। पानी पर निर्भर रहने वाले ये पक्षी अब अपने प्राकृतिक आवास से हटकर मानवीय बस्ती और आसपास के जंगलों में डेरा जमाने को विवश हैं। भूपट्टी, पिरही, खड़कबनी, मिश्रौलिया, परसा जैसे सुदूर इलाकों के बड़े पेड़ों पर गरुड़, बगुला, पनकौवा, चंद्रवाक और ताल बगुला जैसी प्रजातियां प्रजनन कर रही हैं। यहां आसानी से सैकड़ों पक्षी झुण्डों में मौजूद हैं। बगुला पनकौवा सामाजिक पक्षियों में जहां गिने जाते हैं और ये पहले नदी-नहर किनारे के शांत इलाकों में पनपते थे। लेकिन बहुमंजिला इमारतें, मशीनों का शोर और बढ़ती मानवीय गतिविधि के कारण अब इनकी बस्तियां अन्य जगहों पर शिफ्ट हो रही है। एलएनएमयू दरभंगा के भूगोल संकाय के हे...
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