किशनगंज, जनवरी 7 -- किशनगंज। एक संवाददाता लगातार बदलते वर्षा पैटर्न, अंधाधुंध भूजल दोहन, अतिक्रमण व नदियों का प्राकृतिक प्रवाह में मनवीय हस्तक्षेप के कारण छोटी नदियों के सिकुड़ने और अस्तित्व पर संकट का बादल मंडरा रहा है। जबकि ये नदियां स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं और जल संसाधनों का एक महत्वपूर्ण स्रोत होती है। किशनगंज शहर में बहने वाली रमजान नदी के सिकुड़ने और उसका अतिक्रमण होने से आने वाले दिनों में जनजीवन पर इसका बुरा प्रभाव पड़ेगा। इसपर शहर के कुछ लोगों से बातचीत की गई। जिसमें लोगों ने रमजान नदी के अस्तित्व को पुन: वापस लाने की जरुरत बताई। किशनगंज शहर के विजय प्रसाद साहा, लाला शर्मा, सजल साहा, अजीत सिंह आदि ने कहा कि रमजान नदी शहर का लाइफ लाइन हुआ करता था जो धीरे-धीरे अपने अस्तित्व को बचाने की ज...