श्रीनगर, अप्रैल 2 -- गढ़वाल विवि के लोक कला एवं संस्कृति निष्पादन केंद्र में बुधवार को दावानल वन और मन नाटक का भव्य मंचन किया गया। एमए के छात्र शेखर नेगी के लेखन निर्देशन व परिकल्पना में हुए दावानल वन और मन नाटक के माध्यम से दर्शाया गया कि आधुनिकता व तात्कालिक परिस्थितियों के बीच भी हम वनों की रक्षा नहीं कर पा रहे हैं, जिसकी प्रासंगिकता यह है कि कल भी एक तपका जल, जंगल ज़मीन के लिए संघर्ष कर रहा था और आज भी बदला है तो सिर्फ़ काल, संघर्ष नहीं। इस मौके पर आयोजक सचिव डॉ. संजय पांडेय, संगीत अरविंद टम्टा व प्रकाश विकेश वाजपई ने सहयोग दिया।
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