गिरडीह, जनवरी 3 -- बेंगाबाद, प्रतिनिधि। ग्रामीण इलाके में आज भी पौष माह में घर से बाहर खेत-खलिहानों, नदी-नालों और जंगल-पहाड़ों में पुसालो (पिकनिक) मनाने की परंपरा है। पौष मासांत में बड़ी संख्या में महिलाएं एक साथ मिलकर पिकनिक का आनंद उठाया। भले ही अंग्रेजी नववर्ष को लेकर लोग पुरानी परंपरा को भूल गए हैं, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में पौष माह में घर से दूर खेत बहियार में पिकनिक मनाने की परंपरा आज भी बरकरार है। ग्रामीण क्षेत्रों में पिकनिक मनाने का एक अलग अंदाज होता है। लोग खेतों में मिट्टी से चूल्हा तैयार करते हैं और लकड़ी से तरह तरह के भोजन तैयार करते हैं। भोजन तैयार होने के बाद वन या ग्राम देवता को स्मरण कर पहले भोग लगाया जाता है। फिर लोग एक साथ मिलकर बैठकर भोजन करते हैं। आपसी सौहार्द को कायम करता पिकनिक: गांव के लोगों की मानें तो पिकनिक आप...
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