गिरडीह, नवम्बर 5 -- रेम्बा, प्रतिनिधि। महिलाओं के बीच दिया जा रहा समूह ऋण ग्रामीण क्षेत्रों में त्रासदी बनती जा रही है। घरेलू विवाद तथा हिंसा, आत्महत्या, भागने को मजबूर जैसी समस्याएं दिन प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही है। यदि यही स्थिति रही तो कंपनियों के खिलाफ उत्पन्न जनाक्रोश से कभी भी विधि व्यवस्था का संकट उत्पन्न होने से इनकार नहीं किया जा सकता। यहां यह बता दें कि जिले के विभिन्न प्रखंडों में दर्जनाधिक कंपनियां हैं जो महिलाओं का समूह बनाकर उन्हें लोन उपलब्ध कराती हैं। उक्त कार्यों में शामिल कंपनियां ब्याज की ऊंची दरों पर कार्य कर रही हैं। ऋण देकर अगले दिन या सप्ताह से किस्त वसूली शुरू हो जाती है। ऋण और उसके वसूली की जवाबदेही ग्रुप में शामिल स्थानीय महिला सदस्यों की होती है। किसी कारणवश कोई सदस्य यदि ऋण की किस्त देने में विफल रहती है तो स्था...