कौशाम्बी, सितम्बर 7 -- सरकार भले ही छुट्टा गोवंशों की भूख-प्यास और चिकित्सा व्यवस्था के लिए योजना संचालित कर रही है पर सरकार के नुमाइंदों को इनकी तनिक भी चिंता नहीं। वे गोवंशों के स्वास्थ्य को लेकर बिल्कुल संजीदा नहीं दिख रहे हैं। इसकी का नतीजा है कि बरियांवा गोशाला में पिछले पांच वर्षों में गोवंशों के आने-जाने और जान गंवाने के बावजूद संख्या में कमी व बढ़ोतरी नहीं हो सकी है। यह आंकड़ा जिम्मेदारों की मनमानी दर्शाने के लिए पर्याप्त है। चायल तहसील क्षेत्र के ग्राम पंचायत बरियांवा स्थित गोशाला जिम्मेदारों की मनमानी के चलते दुर्दशा का शिकार है। आरोप है कि केयरटेकरों की मनमानी के चलते गोशाला में गोवंश भूख-प्यास से तड़प रहे हैं। वहीं, बीमार पशु चिकित्सा के आभाव में तड़प-तड़प कर दम तोड़ रहे हैं। स्थानीय लोगों की माने तो गोवंशों को सूखा भूसा दिया जाता ह...
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