नई दिल्ली, जनवरी 10 -- नई दिल्ली, प्रमुख संवाददाता। स्वामी हरिदास तानसेन संगीत नृत्य महोत्सव की दूसरी शाम भारतीय शास्त्रीय संगीत की गहन साधना और भावपूर्ण प्रस्तुतियों से सजी रही। कार्यक्रम की शुरुआत उस्ताद अमान अली बंगश के सरोद वादन से हुई, जिन्होंने सेनिया बंगश घराने की समृद्ध विरासत को सधे आलाप, मधुर मींड और तकनीकी निपुणता से जीवंत किया। इसके बाद पं. उल्हास काशलकर ने खयाल गायन की प्रस्तुति दी। कार्यक्रम में बांसुरी वादक पं. हरिप्रसाद चौरसिया ने स्वयं प्रस्तुति देने के बजाय अपने शिष्य रूपक कुलकर्णी को प्रस्तुति देने के लिए आमंत्रित किया। यह गुरु-शिष्य परंपरा का एक दुर्लभ और सशक्त प्रतीक था, जहां गुरु की अनुपस्थिति ही उनकी सर्वव्यापी उपस्थिति बन गई।
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