बदायूं, दिसम्बर 15 -- बिल्सी। क्षेत्र के गांव गुधनी के प्रज्ञा मंदिर में आर्य समाज का साप्ताहिक सत्संग हुआ। आचार्य संजीव रूप ने कहा कि मनुष्य पशु-पक्षियों से इस कारण भिन्न है क्योंकि वह सोचने-समझने की क्षमता रखता है। मनुष्य ही सही और गलत में भेद कर सकता है और वही अपनी नियति तथा भाग्य को बदलने की सामर्थ्य रखता है। कहा कि हमारा भाग्य ईश्वर नहीं लिखता, बल्कि हम स्वयं अपने कर्मों से उसे गढ़ते हैं। जब मनुष्य समाज में फैले अज्ञान और पाखंड को दूर करने का प्रयास करता है, तब उसके लिए संत और विद्वान बनने के द्वार खुलते हैं। इस मौके पर राकेश आर्य, संतोष कुमारी, भावना रानी, मोना रानी, कमलेश कुमारी, मुन्नी देवी, सूरजवती देवी आदि उपस्थित रहे।

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