फतेहपुर, नवम्बर 25 -- फतेहपुर। खजुहा कस्बे का वह छोटा-सा घर, जो बुधवार को दूल्हे की बारात में रोशनी से नहा उठने वाला था, मंगलवार सुबह मातमी सन्नाटे में डूब गया। सुधीर की हल्की-हल्की मुस्कान, वह हड़बड़ी में शादी के कार्ड गिनना, मेहमानों को कमरे दिखाना सब कुछ पलों में खामोश हो गया। दरवाजे पर टंगी झालरों के बीच से गुजरती हवा अब भी वही सवाल पूछ रही है क्या एक नौकरी का दबाव किसी की जिंदगी से बड़ा हो सकता है? होने वाले पति की मौत की सूचना पर पहुंची मंगेतर ने रोते हुए बताया कि कई दिन से काम के दबाव के चलते ठीक से बात नहीं करते थे। मंगलवार सुबह भी गुड मॉर्निंग का मैसेज भेजा था। साथ ही लिखा था कि काम बहुत है। बात नहीं कर पाऊंगा। घर के आंगन में बैठी सुधीर की मां रामकुमारी हर कुछ मिनट में उसी कमरे की ओर देख लेती हैं, जहां उनका बेटा फांसी पर लटका मिल...
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