सीवान, जनवरी 5 -- गुठनी, एक संवाददाता। प्रखंड में वर्षों से हो रही गन्ने की खेती पर राज्य सरकार द्वारा सब्सिडी न देने और किसानों का इस खेती से मोहभंग होने से गन्ने की मिठास और इसकी सोंधी खुशबू अब नहीं दिखाई दे रही हैं। ग्रामीणों की मानें तो विगत 3 दशकों से लगातार प्रखंड के 2 दर्जन से अधिक गांवों में गन्ने की खेती बहूयात की जाती थी। जहां किसान गन्ने से गुण और कई तरह के ग्रामीण पकवान बनाते थे। वही गन्ने से निकलने वाले लकड़ी (चेफुआ) को जलावन के भी काम में लाते थे। किसानों की माने तो जंगली जानवरों और नहरों में पानी की कमी ने इस खेती को पूरी तरह से खत्म कर दिया। जिससे खेती पर सैकड़ों किसान आत्मनिर्भर हुआ करते थे। वह पूरी तरह बेरोजगार हो गए। ग्रामीणों की मानें तो करीब दो हजार हेक्टेयर भूमि में गन्ने की खेती की जाती थी। जिनमें दियारा इलाका गन्ने...