मुजफ्फरपुर, फरवरी 18 -- मुजफ्फरपुर। शहर के इमलीचट्टी स्थित सरकारी बस स्टैंड की चहारदीवारी से सटकर बसे गुजराती मोहल्ले की पहचान पुराने कपड़े की मंडी के रूप में ज्यादा है। गुजरात के मूल निवासी बीते पांच दशक से यहां बसे हैं। अब उनकी तीसरी पीढ़ियां यहां रहती है। करीब एक हजार आबादी है। छोटे-छोटे अस्थायी घरों में 250 से अधिक परिवार रहते हैं। रोजी-रोटी का एकमात्र जरिया पुराने कपड़ों का कारोबार। देहात से शहर तक घूम-घूम कर नए बर्तन देकर पुराने कपड़े लेते हैं। फिर इन कपड़ों की सिलाई आदि को दुरुस्त करके साफ करने के बाद दुकान लगाकर बेचते हैं। बिजली-पानी, आवास, शौचालय सहित अन्य मूलभूत सुविधाओं के अभाव के बावजूद यहां गुजारा कर रहे परिवारों को अब विस्थापन का डर सता रहा है। दुकान पहले ही उजड़ चुकी है। अब तक न तो बसने के लिए सरकार से बासगीत पर्चा मिला और न सरका...
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