आगरा, फरवरी 20 -- हमारी संस्कृति नहीं है, किसी का शोषण करें। हम अतिथि देवो भवः की भावना रखते हैं, हम वसुधैव कुटुंबकम में विश्वास रखते हैं। लेकिन, ब्रिटिशों ने दुनियाभर में हमारे नागरिकों को गिरमिटिया के रूप में ले जाकर उनका शोषण किया। तमाम शोषण, यातनाओं के बाद उन्होंने देश की संस्कृति, ज्ञान और सभ्यता को जीवित रखा है। गिरमिटिया विश्वकर्मा थे, आज भी वह भारत के राष्ट्रदूत हैं। यह बातें गुरुवार को साहित्य अकादमी के सदस्य डॉ. नरेन्द्र पाठक ने कहीं। वह केन्द्रीय हिन्दी संस्थान में अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के शुभारंभ पर बोल रहे थे। गिरमिटिया प्रवासी हिन्दी साहित्य: दशा और दिशा विषय पर संस्थान में गुरुवार को दो दिवसीय संगोष्ठी का शुभारंभ हुआ। उद्घाटन डॉ. भीमराव आंबेडकर विवि की कुलपति प्रो. आशु रानी, डॉ. नरेंद्र पाठक, विश्व हिंदी सचिवालय मॉरीशस की ...
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