नई दिल्ली, जनवरी 25 -- राजेश प्रियदर्शी,वरिष्ठ संपादक, बीबीसी भारत में बीबीसी की पहचान रहे सर मार्क टली का जाना दुखद है। बीबीसी परिवार के लिए तो मानो पितामह के गुजर जाने जैसा है। मेरी खुशकिस्मती है कि उनसे कई बार मिलने और बातें करने का अवसर मिला, लेकिन हमसे पहले वाली पीढ़ी ज्यादा खुशकिस्मत थी, जिसने उनको और ज्यादा करीब से, उनकी सक्रियता वाले दौर में देखा। मार्क टली पिछले कुछ समय से बीमार चल रहे थे, लेकिन कुछ महीनों पहले तक हिन्दुस्तान टाइम्स में उनका कॉलम देखकर यह आश्वस्ति होती थी कि वह ठीक हैं। उनसे सीखने लायक अनेक बातों में से एक बात तो यही थी कि मार्क टली हर किसी से, हर समय सीखते रहते थे। भारत के समाज और राजनीति की उनकी समझ बहुत गहरी थी, लेकिन वह अक्सर अपने वाक्य की शुरुआत कुछ यूं करते, 'मुझे तो ज्यादा मालूम नहीं, आप बताइए कि...।' जिन ...