नई दिल्ली, फरवरी 12 -- गरुड़ पुराण में मृत्यु, अंतिम संस्कार और पारिवारिक व्यवस्था के साथ-साथ जीवित रहते हुए पिता-पुत्र के संबंधों को भी बहुत महत्व दिया गया है। इस पुराण के अनुसार पिता परिवार का आधार होता है और जब तक वह जीवित है, तब तक पुत्र को कुछ मर्यादाओं का पालन करना चाहिए। ये नियम केवल धार्मिक कर्मकांडों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि घर में अनुशासन, सम्मान और संतुलन बनाए रखने के लिए भी हैं। मनुस्मृति और गरुड़ पुराण जैसे ग्रंथों में बार-बार इस बात पर जोर दिया गया है कि पिता के रहते पुत्र को अपने स्थान का ध्यान रखना चाहिए। इससे परिवार में पदक्रम बना रहता है और आपसी आदर की भावना मजबूत होती है। आइए सरल शब्दों में समझते हैं कि पिता के जीवित रहते पुत्र को किन पांच कामों से बचना चाहिए।घर के मुखिया की भूमिका नहीं निभाना गरुड़ पुराण में स्पष्ट रूप...
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