टिहरी, नवम्बर 27 -- नागतीर्थ सेम मुखेम मेले में संवेदना समूह उत्तरकाशी की ओर से मंचित गंगू रमोला नाटक ने दर्शकों को भाव विभोर कर दिया। श्रीकृष्ण-कालियनाग प्रसंग से शुरू होने वाला यह नाटक सेम मुखेम के मंदिर और उसके इतिहास से जुड़ा है। कसे हुए कथानक, सगीत और बेहतरीन अभिनय ने मानो इतिहास को मंच पर जीवंत कर दिया। श्री सेम नागराजा के मेले के समापन पर मणभागी सौड़ मैदान में आयोजित मेला मंच पर भारी जन समूह के बीच नाटक की प्रस्तुति हुई। नाटक के कथावस्तु के अनुसार पौराणिक कथाओं के अनुसार यहां भगवान श्रीकृष्ण के रूप में पूजे जाने वाले नागराजा की कथाएं भी वीर भड़ गंगू रमोला से जुड़ी हैं। गंगू रमोला, रमोली व रैका गढ़ के साथ 18 गढ़ों का गढ़पति था। अपनी प्रजा से गंगू बेहद लगाव था, लेकिन घमंडी होने के कारण श्री कृष्ण ने नागराज के रूप में उसकी परीक्षा ली नागराज ...