गंगापार, अगस्त 1 -- गंगा में जलस्तर दोबारा बढ़ने के साथ ही तटीय इलाके के आधा दर्जन गांवों के ग्रामीणों में भय व दहशत व्याप्त है। हर साल गंगा की बाढ़ के चलते इन गांवों के तमाम मकान गंगा में समाहित हो जाते हैं। जलस्तर बढ़ते ही कछार पर बसे लोगों को आठ साल पुराना वह मंजर याद आ जाता है, जब तमाम मकान गंगा में समाहित हो गये थे और लोगों को महीनों प्राथमिक विद्यालयों और पंचायत भवनों में शरण लेनी पड़ी थी। मांडा क्षेत्र के डेंगुरपुर, उमापुर, जलैया, चौकठा नरवर आदि तमाम गाँव गंगातट पर बसे हुए हैं। हर साल गंगा में बाढ़ आने पर इन गांवों के तमाम मकान गंगा में समाहित हो जाते हैं। इन गांवों के गंगा तट पर बसे तमाम मकान वर्ष 2018 की बाढ़ में गंगा में समाहित हो गये थे। मकान गंगा में समाहित होने के बाद तत्कालीन सांसद डाक्टर रीता बहुगुणा जोशी सहित तमाम जन प्रति...