अलीगढ़, फरवरी 9 -- बरला, संवाददाता। जहाँ एक ओर सरकार 'खेलो इंडिया' जैसे अभियानों के जरिए ग्रामीण खेल प्रतिभाओं को निखारने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर क्षेत्र के युवाओं की हकीकत इन दावों से कोसों दूर है। क्षेत्र में एक भी खेल का मैदान (क्रीड़ा स्थल) न होने के कारण यहाँ के छात्र और युवा दूसरों के खाली पड़े निजी प्लॉटों और मुख्य मार्ग के किनारे वॉलीबॉल जैसे खेल खेलने को मजबूर हैं। क्षेत्र में कोई निर्धारित क्रीड़ास्थल न होने के कारण छात्र और युवा या तो मोबाइल गेम्स में डूबे रहते हैं या फिर तंग गलियों और व्यस्त सड़कों पर खेलने को मजबूर हैं। खिलाड़ी अपनी प्रतिभा का सही प्रदर्शन भी नहीं कर पा रहे हैं। स्थानीय युवाओं का कहना है कि उनमें जज्बा तो है, लेकिन अभ्यास के लिए जमीन नहीं। हर स्तर के छात्र, पर सुविधा शून्य: इस समूह में हाईस्कूल, इंटर...