नई दिल्ली, मई 9 -- सेमिनार में मेरी प्रस्तुति बहुत खराब रही।मैं इस जॉब के लिए उपयुक्त नहीं हूं।उस दिन के विवाह समारोह में सबसे बुरी मैं दिख रही थी। अकसर हम अपनी आलोचना अपने-आपसे या दूसरों से करने लग जाते हैं। अपना सही मूल्यांकन करना तो वाजिब है, लेकिन हमेशा खुद की शिकायत करते रहना कहीं से भी सही नहीं है। मनोविज्ञान खुद की शिकायत करने की आदत को सेल्फ क्रिटिसिज्म यानी आत्म-आलोचना कहता है। महान संत कबीरदास का दोहा 'बुरा जो देखन मैं चला... खुद को सही रास्ते पर ले जाने के लिए तो ठीक है, लेकिन आत्म-आलोचना को स्वभाव का हिस्सा बना लेना बिल्कुल भी ठीक नहीं है।क्या है आत्म-आलोचना? सीनियर साइकोलोजिस्ट डॉ. ईशा सिंह बताती हैं, 'खुद की आलोचना या आत्म-आलोचना खुद की कठोरता के साथ मूल्यांकन करने की प्रवृत्ति है। आत्म-आलोचना करने वाले व्यक्ति असफलता और दूस...
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