मधुबनी, फरवरी 3 -- मधुबनी। बजट 2026-27 मधुबनी के लिए एक नई आस लेकर आया है। यहां की अर्थव्यवस्था की कभी आधार रहे व जिले की पहचान बने खादी ग्रामोद्योग, मधुबनी पेंटिंग और अन्य पारंपरिक कुटीर व लघु उद्योगों को नई दिशा मिलने की उम्मीद जगी है। वर्षों से ये उद्योग उपेक्षा, सीमित बाजार और संसाधनों की कमी से जूझ रहे हैं। जिले में खादी, हस्तकरघा, पेंटिंग, पेपरमेसी, सिक्की कला, बांस शिल्प और अन्य घरेलू उद्योगों से जुड़े कारीगरों की स्थिति फिलहाल संतोषजनक नहीं मानी जा रही है। कई इकाइयां बंद हो चुका है तो कई बंद होने के कगार पर हैं, तो कई परिवार आंशिक रूप से ही इस पेशे से जुड़े रह गए हैं। जिले में उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार करीब 20 हजार परिवार प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से खादी ग्रामोद्योग और मधुबनी पेंटिंग जैसे पारंपरिक कार्यों से जुड़े हैं। लेकिन बाजार त...