नई दिल्ली, जनवरी 30 -- बात 1991 की है। देश में लोकसभा के चुनाव हो रहे थे। इसी बीच पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की लिट्टे उग्रवादियों ने एक आत्मघाती बम विस्फोट में हत्या कर दी। देश का राजनीतिक मिजाज बदल गया और उन चुनावों में कांग्रेस पार्टी की जीत हुई। पीवी नरसिम्हा राव को प्रधानमंत्री बनाया गया। उस समय प्रधानमंत्री राव ने क्षेत्रीय छत्रपों का संतुलन बिठाते हुए कई दिग्गजों को अपने मंत्रिमंडल में जगह दी थी। उन्हीं में एक थे शरद पवार, जिन्हें रक्षा मंत्री बनाया गया था लेकिन जब उन्हें यह जिम्मेदारी दी गई थी, तब वह संसद के किसी भी सदन के सदस्य नहीं थे। शरद पवार उस समय महाराष्ट्र विधानसभा में बारामती से विधायक थे, जबकि उनके भतीजे अजित पवार पहली बार बारामती संसदीय सीट से चुनकर सांसद बने थे। संविधान के नियमानुसार छह महीने के अंदर शरद पवार को सं...