नई दिल्ली, जनवरी 23 -- अकसर हम प्यार का सही मतलब खोजते-खोजते इतना आगे निकल जाते हैं कि अपना वजूद ही भूल बैठते हैं। यही वजह है कि आजकल बोझिल होते रिश्तों में नई जान फूंकने के लिए लोग पर्सनल स्पेस की मांग करने लगे हैं। हालांकि कुछ लोग इस पर्सनल स्पेस की मांग को रिश्ते में आई दरार, स्वार्थ या फीकी पड़ती दिलचस्पी समझने की गलती कर बैठते हैं, जबकि हकीकत इसके उलट होती है। जिस तरह एक पौधे को पनपने के लिए खाद और पानी के साथ-साथ खुली हवा की भी जरूरत होती है, ठीक वैसे ही किसी भी रिश्ते की मजबूती इस बात पर निर्भर करती है कि आप एक-दूसरे को जीवन जीने की कितनी आजादी देते हैं। यह 'स्पेस' आपसे दूर जाने का रास्ता नहीं, बल्कि खुद के भीतर उस सुकून को ढूंढने का जरिया है, जो आपको अपने पार्टनर के लिए और भी बेहतर और खुशमिजाज इंसान बनाता है। पर्सनल स्पेस का मतलब ...
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