नई दिल्ली, जनवरी 19 -- पेरेंटिंग एक बड़ी जिम्मेदारी है। इसके जरिए ही बच्चे का भविष्य या तो संवर जाता है या बिगड़ जाता है। हर माता-पिता चाहते हैं कि उनका बच्चा खुश रहे, उनसे खुलकर बात करे और कभी उनसे दूर ना जाए। इसी चाह में कई बार माता-पिता यह सोचने लगते हैं कि अगर वे बच्चे के सबसे अच्छे दोस्त बन जाएंगे, तो रिश्ता और मजबूत हो जाएगा। लेकिन पेरेंटिंग कोच रेनू गिरधर बताती हैं कि यह सोच सुनने में अच्छी लगती है, पर हकीकत में यह हमेशा सही नहीं होती। बच्चे को दोस्त नहीं, बल्कि ऐसे माता-पिता चाहिए जो प्यार के साथ सही दिशा दिखाएं, सही और गलत का फर्क सिखाएं और जरूरत पड़ने पर सख्ती भी दिखा सकें। यही संतुलन बच्चे के जीवन को सही राह पर ले जाता है।बच्चे दोस्त नहीं होते, इस सच को समझना जरूरी है पेरेंटिंग कोच रेनू गिरधर कहती हैं कि बच्चे आपके दोस्त नहीं ह...