नई दिल्ली, जनवरी 15 -- नई दिल्ली, प्रमुख संवाददाता। दिल्ली उच्च न्यायालय ने गुरुवार को कहा कि वर्ष 2023 के संसद सुरक्षा उल्लंघन मामले में आरोपियों द्वारा 13 दिसंबर की तारीख चुनना महज इत्तेफाक नहीं हो सकता। इसी दिन वर्ष 2001 में भी संसद पर हमला हुआ था। न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह एवं न्यायमूर्ति मधु जैन की पीठ ने कहा कि 13 दिसंबर 2001 को ही संसद पर हमला हुआ था। वर्ष 2023 में भी आरोपियों ने इसी दिन को चुना। सुनवाई के दौरान पीठ ने आरोपी मनोरंजन के वकील से पूछा कि आरोपी संसद में कैसे घुसे। वकील ने कहा कि आरोपियों ने बेरोजगारी के मुद्दे को उठाने के लिए विरोध-प्रदर्शन किया था। जब पीठ ने घटना की तारीख के बारे में वकील से सवाल किया तो उन्होंने कहा कि वर्ष 2001 के हमले और वर्ष 2023 के सुरक्षा उल्लंघन के बीच कोई संबंध नहीं है। इस पर पीठ ने टिप्पणी ...