बागेश्वर, मार्च 7 -- सात गांव सतराली के ताकुला से आए लोहनी लोगों को भेटा गांव भेंट में दिया गया था। कोट भ्रामरी मंदिर में आचार्य पद से नवाजा था। तब से लेकर आज तक कोट भ्रामरी मंदिर में भेटा गांव के लोहनी लोग अष्टमी को चीर बंधन करते हैं। इस परंपरा को शुक्रवार को भी वहां के लोगों निभाया। चीर बंधन के बाद खड़ी होली का गायन किया। भेटा के होली डांगर नंदा बल्लभ लोहनी ने बताया चीर बंधन रंग- बिरंगे कपड़ों को एक छड़ी में बांधा जाता है और उसे मंदिर प्रांगण में स्थापित कर खड़ी होली गाई जाती है। उसके बाद चतुर्दशी की शाम को चीर का दहन किया जाता है। भेटा में सिर्फ लोहनी जाति के लोग ही रहते हैं। भेटा गांव के लोहनी कोट भ्रामरी मंदिर पुजारी के आचार्य हैं। भेटा के लोहनी लोगों को चीर बंधन का अधिकार चंद राज वंश की दिया है। कोट भ्रामरी में चीर बंधन के बाद कत्यु...