गंगापार, अक्टूबर 12 -- मंथरा और कैकेयी के संवाद ने अयोध्या की शांति भंग करने वाले उस क्षण को सजीव कर दिया, जब मोह और भ्रम में फंसी कैकेयी ने राम को वनवास भेजने का वर मांगा। जब दशरथ मौन होकर पश्चाताप की पीड़ा में तड़पते दिखाई दिए और राम शांत मुख से राज्य त्यागने का संकल्प लेते हैं, दर्शकों की आंखें भर गईं। कस्बा भारतगंज में शनिवार की रात रामलीला मे जब मंथरा और कैकेयी के बीच संवाद देवी! राम के राज्याभिषेक से तुम्हारा क्या हित? भरत ही अयोध्या के योग्य हैं ने दर्शकों के हृदय में उस समय की विडंबना को सजीव कर दिया। कैकेयी का कठोर निर्णय और दशरथ की विवशता ने दर्शकों को वेदना से भर दिया। जब राम को वनवास की आज्ञा सुनाई जाती है, तो दशरथ की आंखों में पश्चाताप और सीने में वेदना तैरने लगती है। वहीं, राम शांत भाव से सिर झुकाकर "सुनि कैकेयी बचन रघुवीरा,...
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